Thursday, 14 June 2012

अच्छे काम की कदर तो है



आज एक प्रतिभाशाली बच्ची की स्टोरी आयी. मैंने कुछ हेडिंग्स बनायीं। उन्हें अपने पास ही रख लिया क्योंकि किसी ने मुझे हेडिंग बनाने के लिए कहा नहीं था और न ही स्टोरी एडिटिंग के लिए मेरे पास आयी थी।

आधे घंटे बाद, वह स्टोरी पेज पर लगी। दो दो न्यूज़ एडिटर उसे लगाने में भिड़े थे। एक न्यूज़ एडिटर ने दूसरे से पूछा- हेडिंग क्या होनी चाहिए। उसने मुझसे भी पूछा- जो लगी है वह हेडिंग कैसी है। मैंने अपनी बनायीं हेडिंग वाला कागज़ उसे दे दिया। दोनो एक हेडिंग पर सहमत हुए।

इस बीच वैल्यू हेड अपनी हेडिंग ले के आ गये। उनकी वरिष्ठता को देखकर न्यूज़ एडिटरों ने उनकी हेडिंग लगा ली. हालाँकि यह साफ़ लग रहा था कि उन्हें हेडिंग पसंद नहीं आ रही थी.

 एक न्यूज़ एडिटर ने बोल ही दिया कि  पिछली हेडिंग भी ठीक लग रही थी। उसने फिर मुझसे भी पूछा और साथी न्यूज़ एडिटर से भी। उसने जाहिर कर दिया कि उसे मेरी हेडिंग पसंद आई।

अंततः मेरी हेडिंग लगाई गई ।

ऐसा तब हुआ जब न्यूज़ एडिटरों से मेरे सम्बन्ध बहुत अच्छे नहीं हैं।

अच्छे काम की कदर तो है।

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