आज एक मेले में घूमते हुए एक नाराज सेल्समैन से मुलाकात हो गयी। वह सब्जियां छीलने काटने के औजार बेच रहा था। ऐसे कई औजार हम पिछले कई सालों में खरीदकर ले जा चुके हैं। पत्नी ने कहा- इससे कुछ नहीं छिलाता भइया। सुनते ही वह नाराज हो गया। कहने लगा- ये सब कहने की बातें हैं मैडम। हर दूसरी महिला यही कहती है। आप थोड़ी देर खड़े रहकर खुद सुन लीजिए। तभी दो ग्राहक और आ गए। उनमें से एक ने किसी औजार के बारे में कहा कि इससे ठीक तरह काम नहीं होता। सेल्समैन ने फिर वही कहा- बोलने की बातें हैं। हर दूसरा ग्राहक यही कहता है। हमें भी बहुत सी चीजें चलानी नहीं आतीं। इसका ये मतलब थोड़े है कि वह चीज ही खराब है। किसी को बुरा बोलने से पहले खुद को देख लेना चाहिए कि कहीं कमी हममें ही तो नहीं है।
सिलाई मशीन के स्टाल पर भी एक महिला ने सेल्समैन से कहा- आप तो एक्सपर्ट हो भइया। हमसे कहां होगा। उसने कहा-अपन कार भी लेते हैं तो पहले उसे चलाना सीखना पड़ता है। ये काम भी करते करते आएगा। चीज घर में रहेगी तो सीख भी जाएंगे।
पत्नी को सिलाई मशीनें पसंद आयीं। सब आठ दस हजार वाली थीं। उसने कहा कि तबीयत कुछ ठीक हो जाए तो लेने की सोचूंगी। मशीनें पसंद तो मुझे भी आयींं। बगैर पैडल वाली थीं। मोटर से चल रही थीं। सेल्समैन ने बताया कि घर आकर चलाकर बताएंगे। एक साल तक सर्विस भी देंगे। नाजुक सी दिख रही एक मशीन के बारे में उसने बताया कि मोटी सुई लगाकर इससे जींस भी सिल सकते हैं। क्रिएटिव लोगों के लिए यह मशीनें अच्छा रोजगार साबित हो सकती हैं। इनसे तरह तरह के टांके लग रहे थे और उनसे एक सेल्समैन डिजाइनें बनाकर दिखा रहा था।
एक सेल्समैन मल्टीपरपज टेबल बेच रहा था। उसे बिस्तर पर रखकर खाना खाया जा सकता था। जमीन पर रखकर लिखना पढऩा किया जा सकता था। उसकी फोल्डिंग टांगें एडजस्ट करके उसे डेस्क बनाया जा सकता था। मरीज उसे स्लोप की तरह इस्तेमाल करके पीठ दर्द से निजात पा सकते थे। उस पर पैर रखकर भी सोया जा सकता था। ऑफिस टेबल के ऊपर रखकर उसे लिखने पढऩे के लिए इस्तेमाल किया जा सकता था। स्टाल पर पोस्टर लगे थे जिसमें कुछ लोग टेबल का इस्तेमाल करते नजर आ रहे थे। इन लोगों में वह सेल्समैन भी था। वह संभवत: उस टेबल का अविष्कारक और दुकान का मालिक था। उसका वजन 110 किलो था। उसने टेबल का पूरा प्रदर्शन करके दिखाया। पालथी मारकर बैठा और टेबल पर लिखने की एक्टिंग की। उसने बताया-अगर मैं पालथी मारकर बैठ सकता हूं तो कोई भी बैठ सकता है। पत्नी को वह टेबल पसंद आया। लेकिन 1400 रुपए हमें ज्यादा लगे। पर फिर कहना होगा कि टेबल अच्छी थी। वह मध्यमवर्गीय घरों के लिए ठीक थी। देशी किस्म की टेबल। इसे अलग मटीरियल से बनाकर महंगे दामों पर भी बेचा जा सकता है।
फर्नीचर की एक दुकान पर गार्डन में रखी जाने वाली लोहे व लकड़ी वाली कुर्सियां और एक टेबल मिल रही थी। मेरे पास तेईस हजार रुपए और गार्डन वाला घर होता तो तुरंत खरीद लेता। मुझे ऐसी चेयर बहुत पसंद है। इसे देखकर ही रोमेंटिक सी फीलिंग होती है। हालांकि ऐसा कोई व्यक्तिगत अनुभव मेरा नहीं है। लेकिन तस्वीरों मेें और फिल्मों में अक्सर इन पर दो लोग प्रेम से बातें करते नजर आते हैं। एक झूला भी था जो इसका सपना है। वह अठारह हजार का था। मेरी कमाई अधिक होती तो वह भी ले लेता। देखकर अच्छा लगा कि चलो कोई तो बैठेगा इन पर।
फर्नीचर के एक बड़े स्टाल पर नब्बे हजार के डायनिंग टेबल पर बैठकर देखा। इसने कहा- रॉयल लुक है। मुझे रॉयल वॉयल पसंद नहीं है। मेरा टेस्ट दूसरा है। हालांकि किसी मॉल में दस हजार का सेंटर टेबल मुझे भी पसंद आया। बच्चों का डबल स्टोरी बेड प्लस स्टडी टेबल भी बहुत पसंद आया। बाजार में घूमो तो क्रिएटिविटी देखकर आनंद आ जाता है।
यहां कपड़े टांगने के लिए कई हुक वाली जंजीर मिल रही थी। अलमारी के भीतर थोड़ी सी जगह में बहुत सारे कपड़े टांगे जा सकते थे। सेल्समैन ने बताया कि अलमारी के भीतर कपड़े टांगने वाले हिस्से में इतनी हाइट होती है कि जंजीर से टंगे कपड़े टंगे रहेंगे। एक महिला ने बताया कि हम लोग इस हिस्से में काफी सारा सामान रखते हैं। इसके बाद इतनी हाइट नहीं बचती। सेल्समैन हंसने लगा। उसने कहा कि फिर कुछ नहीं किया जा सकता। हालांकि बाद में उसने कहा कि अलमारी के बाहर भी जंजीर का इस्तेमाल है। बारिश में कम जगह में कपड़े सुखाने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्लास्टिक वाली चीजें जोडऩे के लिए एक सेल्समैन प्लास्टिक की छड़ें बेच रहा था। उसे पिघलाकर कहीं टपका दो। इससे प्लास्टिक की बाल्टी के छेद बंद किए जा सकते हैं और कपड़े टांगने का हुक दीवार से चिपकाया जा सकता है। सेल्समैन ने कंक्रीट के एक भारी ब्लॉक से दो हुक चिपका रखे थे और हुक की मदद से वह ब्लॉक उठाकर दिखा रहा था कि यह जोड़ मजबूत है। उसने पानी से भरी प्लास्टिक की बाल्टी में एक सूजा घुसा कर छेद कर दिया। पानी की धार बहने लगी। उसने प्लास्टिक की एक स्टिक को लाइटर से गर्म किया और छेद पर लगा दिया। छेद बंद हो गया। उसने बताया कि बहते पानी में भी यह काम करता है। बाल्टी में ढेर सारे छेद किए गए थे जैसे छलनी में होते हैं। उन्हें प्लास्टिक की स्टिक पिघलाकर बंद किया गया था। वह हर उत्सुक ग्राहक को ऐसा करके दिखा रहा था।
मेले में हमने कुछ खरीदा नहीं। बल्कि यह देखकर आए कि क्या क्या बिकता है। मुझे इस बात का अफसोस नहीं है कि मैं कुछ खरीद नहीं सका। अफसोस इस बात का है कि मैं कुछ बेच क्यों नहीं रहा हूं।
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