उषा हमारे घर काम करती है. मुझे लगता है वह हमारे घर की सदस्य है. बल्कि हमारे घर की ज़रुरत है. उसके आने से घर का अकेलापन दूर होता है. खासकर पत्नी का. उषा उम्र में उससे बहुत छोटी है लेकिन उसकी सहेली जैसी है. एक बार दोना साथ साथ मौल घूमने भी जा चुके हैं. आपस में बहुत सी बातें शेयर करते रहते हैं.
उषा बहुत सुंदर है. ऐसा पत्नी कई बार कह चुकी है. हम लोगों ने उसकी फोटो भी खींची है.
उषा को लेकर मन में कई तरह के विचार आते हैं. इतनी सुंदर लड़की को देखकर ये तो लगेगा ही के काश ये मेरी दोस्त होती. उषा के आने से लगता है के अपने बच्चे की कमी दूर हो गयी. हमारी सही उम्र में शादी हो गयी होती तो बेटी इतनी बड़ी होती. उषा के आने से मुझे लगता है के मुझे समझने वाला कोई आ गया है. वह इसी धरती की बेटी है. छत्तीसगढ़ के लोग आमतौर पर मानवीय होते हैं. वे काम न करने वालों से बहुत बेदर्दी से पेश नहीं आते. हालाँकि छत्तीसगढ़ की महिलाओं को लेकर मैं किसी ग़लतफ़हमी में नहीं हूँ. सब्जी बाजार में उनका दुर्गा चंडी वाला रूप दिखता है. पर उषा नर्म दिल लड़की है. उसके आने से मुझे एक अंदरूनी सहारा मिलता है. एक नैतिक समर्थन मिलता है.
उषा के आने का समय होता है और मुझे असमय उठाये जाने का समय होता है. मैं रात की ड्यूटी से लौटकर खाना खाता हूँ, टीवी देखता हूँ फिर सोता हूँ. सुबह अधूरी नींद में उठना पड़ता है. डांट खाते खाते कुछ कुछ काम करता हूँ या डांट खाकर भी नहीं करता. वह मुझे आलसी समझती होगी. हालाँकि मैं हूँ भी आलसी. पर कोई ऐसा समझे तो फिर भी बुरा लगता है.
उषा के घर में वह है और उसकी माँ है. बीच में उसे देखने लड़के वाले आये थे. पहले सुना के रिश्ता पक्का हो गया. फिर पता चला के इन लोगों ने ही रिश्ता तोड़ दिया. लड़का शराब पीता था. उषा ने बताया के इसके बाद लड़का उसकी माँ को रिश्ता न तोड़ने के लिए धमका रहा है. अब उस बारे में बात नहीं होती.
कभी कभी मै घर में अकेले होता हूँ जब उषा आती है. सहमी सी रहती है. चुपचाप काम करके निकल जाती है. मैं कभी कभी घर से बाहर निकलकर बैठ जाता हूँ. भीतर रहता हूँ तो दोनों असहज हो जाते हैं.
मुझे उसका झाड़ू पोछा करना अच्छा नहीं लगता. हालांकि मैं भी तो नौकरी करता हूँ. मुझे भी कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है. मेरी माँ ने भी तो जीवन भर नौकरी की. मेरी बहने भी तो टीचर के रूप में काम करती हैं. चलो उषा भी काम करती है तो क्या बुरा है. ईश्वर करे हमसे उसके साथ कोई ज्यादती न हो.
कभी कभी मुझे लगता है के उस पर काम ज्यादा हो गया है. तब मुझे अच्छा नहीं लगता. वह हमारे अलावा नीचे रहने वाले मकान मालिक के घर भी काम करती है और मोहल्ले के दो और घरों में भी. नन्ही सी जान और इतना काम.
उसने दो महीने पहले मकान मालिक से पुरानी साइकिल खरीदी है. मुझे यह बहुत अच्छा लगा. उषा शौकीन है. पत्नी ने बताया के उसके पास एक दो महंगे सूट हैं. उसने शायद पार्लर से भवे भी बनवा रखी हैं. कलाइयों में चूड़ियाँ और पावों में पायल तो खैर वह पहनती ही है. मैंने नज़रें बचाकर देखा है के वह बिंदी भी लम्बी सी लगाती है और उसकी हेयर स्टाइल बदलती रहती है.
उषा इतनी सुंदर है. युवा है. अकेली है. क्या उसका कोई दोस्त नहीं होगा?
अभी तक तो इसके बारे में सुना नहीं. पत्नी को कुछ पता होता तो वह ज़रूर बताती.
मेरी ईर्ष्या कहती है के मत ही हो कोई लड़का उसका दोस्त.
लेकिन बड़े होने का तकाजा है के मैं उसके लिए एक बहुत अच्छे जीवन साथी की कामना करूं. भगवान शिव उसकी मनोकामना पूरी करें.
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